Thursday, January 1, 2015

हमारा भारतीय नववर्ष

शक संवत एवं विक्रमी संवत

शक संवत और विक्रमी संवत में महीनो के नाम और क्रम एक ही हैं- चैत्र, बैसाख, ज्येष्ठ, आसाढ़, श्रावण, भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, पौष, अघन्य, माघ, फाल्गुन| दोनों ही संवतो में दो पक्ष होते हैं- शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष| दोनों संवतो में एक अंतर यह हैं कि जहाँ विक्रमी संवत में महीना पूर्णिमा के बाद कृष्ण पक्ष से शुरू होता हैं, वंही शक संवत में महीना अमावस्या के बाद शुक्ल पक्ष से शुरू होते हैं| उत्तर भारत में दोनों ही संवत चैत्र के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा को आरम्भ होते हैं, जोकि शक संवत के चैत्र माह की पहली तारीख होती हैं, किन्तु यह विक्रमी संवत के चैत्र की १६ वी तारीख होती हैं, क्योकि विक्रमी संवत के चैत्र माह के कृष्ण पक्ष के पन्द्रह दिन बीत चुके होते हैं| गुजरात में तो विक्रमी संवत कार्तिक की अमावस्या के अगले दिन से शुरू होता हैं|

Wednesday, December 31, 2014

1 जनवरी हमारे नए साल की शुरुआत नहीं है।

क्या आप इसाई हैं जो हिन्दू धर्म के केलिन्डर को छोड़कर एक इसाई पादरी द्वारा बिना किसी वैज्ञानिक कारण के बनाये गए 1 जनवरी को नव वर्ष मान रहे हैं ?

http://www.bharatsamachaar.com/2014/12/blog-post_30.html

Tuesday, December 23, 2014

भारत के महान वैज्ञानिक ऋषि।

_________________________
हजारों साल पहले ऋषियों के आविष्कार, पढ़कर रह जाएंगे हैरान |

असाधारण या यूं कहें कि प्राचीन वैज्ञानिक ऋषि-मुनियों द्वारा किए आविष्कार व उनके द्वारा उजागर रहस्यों को जिनसे आप भी अब तक अनजान होंगे –

💥महर्षि दधीचि -

महातपोबलि और शिव भक्त ऋषि थे। वे संसार के लिए कल्याण व त्याग की भावना रख वृत्तासुर का नाश करने के लिए अपनी अस्थियों का दान करने की वजह से महर्षि दधीचि बड़े पूजनीय हुए। इस संबंध में पौराणिक कथा है कि
एक बार देवराज इंद्र की सभा में देवगुरु बृहस्पति आए। अहंकार से चूर इंद्र गुरु बृहस्पति के सम्मान में उठकर खड़े नहीं हुए। बृहस्पति ने इसे अपना अपमान समझा और देवताओं को छोड़कर चले गए। देवताओं ने विश्वरूप को अपना गुरु बनाकर काम चलाना पड़ा, किंतु विश्वरूप देवताओं से छिपाकर असुरों को भी यज्ञ-भाग दे देता था। इंद्र ने उस पर आवेशित होकर उसका सिर काट दिया। विश्वरूप त्वष्टा ऋषि का पुत्र था। उन्होंने क्रोधित होकर इंद्र को मारने के लिए महाबली वृत्रासुर को पैदा किया। वृत्रासुर के भय से इंद्र अपना सिंहासन छोड़कर देवताओं के साथ इधर-उधर भटकने लगे।
ब्रह्मादेव ने वृत्तासुर को मारने के लिए वज्र बनाने के लिए देवराज इंद्र को तपोबली महर्षि दधीचि के पास उनकी हड्डियां मांगने के लिये भेजा। उन्होंने महर्षि से प्रार्थना करते हुए तीनों लोकों की भलाई के लिए अपनी हड्डियां दान में मांगी। महर्षि दधीचि ने संसार के कल्याण के लिए अपना शरीर दान कर दिया। महर्षि दधीचि की हड्डियों से वज्र बना और वृत्रासुर मारा गया। इस तरह एक महान ऋषि के अतुलनीय त्याग से देवराज इंद्र बचे और तीनों लोक सुखी हो गए।

💥आचार्य कणाद -

कणाद परमाणुशास्त्र के जनक माने जाते हैं। आधुनिक दौर में अणु विज्ञानी जॉन डाल्टन के भी हजारों साल पहले आचार्य कणाद ने यह रहस्य उजागर किया कि द्रव्य के परमाणु होते हैं।

💥भास्कराचार्य -

आधुनिक युग में धरती की गुरुत्वाकर्षण शक्ति (पदार्थों को अपनी ओर खींचने की शक्ति) की खोज का श्रेय न्यूटन को दिया जाता है। किंतु बहुत कम लोग जानते हैं कि गुरुत्वाकर्षण का रहस्य न्यूटन से भी कई सदियों पहले भास्कराचार्यजी ने उजागर किया। भास्कराचार्यजी ने अपने ‘सिद्धांतशिरोमणि’ ग्रंथ में पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के बारे में लिखा है कि ‘पृथ्वी आकाशीय पदार्थों को विशिष्ट शक्ति से अपनी ओर खींचती है। इस वजह से आसमानी पदार्थ पृथ्वी पर गिरता है’।

💥आचार्य चरक -

‘चरकसंहिता’ जैसा महत्तवपूर्ण आयुर्वेद ग्रंथ रचने वाले आचार्य चरक आयुर्वेद विशेषज्ञ व ‘त्वचा चिकित्सक’ भी बताए गए हैं। आचार्य चरक ने शरीरविज्ञान, गर्भविज्ञान, औषधि विज्ञान के बारे में गहन खोज की। आज के दौर की सबसे ज्यादा होने वाली डायबिटीज, हृदय रोग व क्षय रोग जैसी बीमारियों के निदान व उपचार की जानकारी बरसों पहले ही उजागर की।

💥भारद्वाज -

आधुनिक विज्ञान के मुताबिक राइट बंधुओं ने वायुयान का आविष्कार किया। वहीं हिंदू धर्म की मान्यताओं के मुताबिक कई सदियों पहले ऋषि भारद्वाज ने विमानशास्त्र के जरिए वायुयान को गायब करने के असाधारण विचार से लेकर, एक ग्रह से दूसरे ग्रह व एक दुनिया से दूसरी दुनिया में ले जाने के रहस्य उजागर किए। इस तरह ऋषि भारद्वाज को वायुयान का आविष्कारक भी माना जाता है।

💥कण्व -

वैदिक कालीन ऋषियों में कण्व का नाम प्रमुख है। इनके आश्रम में ही राजा दुष्यंत की पत्नी शकुंतला और उनके पुत्र भरत का पालन-पोषण हुआ था। माना जाता है कि उसके नाम पर देश का नाम भारत हुआ। सोमयज्ञ परंपरा भी कण्व की देन मानी जाती है।

💥कपिल मुनि -

भगवान विष्णु का पांचवां अवतार माने जाते हैं। इनके पिता कर्दम ऋषि थे। इनकी माता देवहूती ने विष्णु के समान पुत्र चाहा। इसलिए भगवान विष्णु खुद उनके गर्भ से पैदा हुए। कपिल मुनि 'सांख्य दर्शन' के प्रवर्तक माने जाते हैं। इससे जुड़ा प्रसंग है कि जब उनके पिता कर्दम संन्यासी बन जंगल में जाने लगे तो देवहूती ने खुद अकेले रह जाने की स्थिति पर दुःख जताया। इस पर ऋषि कर्दम देवहूती को इस बारे में पुत्र से ज्ञान मिलने की बात कही। वक्त आने पर कपिल मुनि ने जो ज्ञान माता को दिया, वही 'सांख्य दर्शन' कहलाता है।
इसी तरह पावन गंगा के स्वर्ग से धरती पर उतरने के पीछे भी कपिल मुनि का शाप भी संसार के लिए कल्याणकारी बना। इससे जुड़ा प्रसंग है कि भगवान राम के पूर्वज राजा सगर ने द्वारा किए गए यज्ञ का घोड़ा इंद्र ने चुराकर कपिल मुनि के आश्रम के करीब छोड़ दिया। तब घोड़े को खोजते हुआ वहां पहुंचे राजा सगर के साठ हजार पुत्रों ने कपिल मुनि पर चोरी का आरोप लगाया। इससे कुपित होकर मुनि ने राजा सगर के सभी पुत्रों को शाप देकर भस्म कर दिया। बाद के कालों में राजा सगर के वंशज भगीरथ ने घोर तपस्या कर स्वर्ग से गंगा को जमीन पर उतारा और पूर्वजों को शापमुककिया।

💥पतंजलि -

आधुनिक दौर में जानलेवा बीमारियों में एक कैंसर या कर्करोग का आज उपचार संभव है। किंतु कई सदियों पहले ही ऋषि पतंजलि ने कैंसर को रोकने वाला योगशास्त्र रचकर बताया कि योग से कैंसर का भी उपचार संभव है।

💥शौनक :

वैदिक आचार्य और ऋषि शौनक ने गुरु-शिष्य परंपरा व संस्कारों को इतना फैलाया कि उन्हें दस हजार शिष्यों वाले गुरुकुल का कुलपति होने का गौरव मिला। शिष्यों की यह तादाद कई आधुनिक विश्वविद्यालयों तुलना में भी कहीं ज्यादा थी।

💥महर्षि सुश्रुत -

ये शल्यचिकित्सा विज्ञान यानी सर्जरी के जनक व दुनिया के पहले शल्यचिकित्सक
(सर्जन) माने जाते हैं। वे शल्यकर्म या आपरेशन में दक्ष थे। महर्षि सुश्रुत द्वारा लिखी गई ‘सुश्रुतसंहिता’ ग्रंथ में शल्य चिकित्सा के बारे में कई अहम ज्ञान विस्तार से बताया है। इनमें सुई, चाकू व चिमटे जैसे तकरीबन 125 से भी ज्यादा शल्यचिकित्सा में जरूरी औजारों के नाम और 300 तरह की शल्यक्रियाओं व उसके पहले की जाने वाली तैयारियों, जैसे उपकरण उबालना आदि के बारे में पूरी जानकारी बताई गई है।
जबकि आधुनिक विज्ञान ने शल्य क्रिया की खोज तकरीबन चार सदी पहले ही की है। माना जाता है कि महर्षि सुश्रुत मोतियाबिंद, पथरी, हड्डी टूटना जैसे पीड़ाओं के उपचार के लिए शल्यकर्म यानी आपरेशन करने में माहिर थे। यही नहीं वे त्वचा बदलने की शल्यचिकित्सा भी करते थे।

💥वशिष्ठ :

वशिष्ठ ऋषि राजा दशरथ के कुलगुरु थे। दशरथ के चारों पुत्रों राम, लक्ष्मण, भरत व शत्रुघ्न ने इनसे ही शिक्षा पाई। देवप्राणी व मनचाहा वर देने वाली कामधेनु गाय वशिष्ठ ऋषि के पास ही थी।

💥विश्वामित्र :

ऋषि बनने से पहले
विश्वामित्र क्षत्रिय थे। ऋषि वशिष्ठ से कामधेनु गाय को पाने के लिए हुए युद्ध में मिली हार के बाद तपस्वी हो गए। विश्वामित्र ने भगवान शिव से अस्त्र विद्या पाई। इसी कड़ी में माना जाता है कि आज के युग में प्रचलित प्रक्षेपास्त्र या मिसाइल प्रणाली हजारों साल पहले विश्वामित्र ने ही खोजी थी।
ऋषि विश्वामित्र ही ब्रह्म गायत्री मंत्र के दृष्टा माने जाते हैं। विश्वामित्र का अप्सरा मेनका पर मोहित होकर तपस्या भंग होना भी प्रसिद्ध है। शरीर सहित त्रिशंकु को स्वर्ग भेजने का चमत्कार भी विश्वामित्र ने तपोबल से कर दिखाया।

💥महर्षि अगस्त्य -
वैदिक मान्यता के मुताबिक मित्र और वरुण देवताओं का दिव्य तेज यज्ञ कलश में मिलने से उसी कलश के बीच से तेजस्वी महर्षि अगस्त्य प्रकट हुए। महर्षि अगस्त्य घोर तपस्वी ऋषि थे। उनके तपोबल से जुड़ी पौराणिक कथा है कि एक बार जब समुद्री राक्षसों से प्रताड़ित होकर देवता महर्षि अगस्त्य के पास सहायता के लिए पहुंचे तो महर्षि ने देवताओं के दुःख को दूर करने के लिए समुद्र का सारा जल पी लिया। इससे सारे राक्षसों का अंत हुआ।

💥गर्गमुनि -
गर्ग मुनि नक्षत्रों के खोजकर्ता माने जाते हैं। यानी सितारों की दुनिया के जानकार। ये गर्गमुनि ही थे, जिन्होंने श्रीकृष्ण एवं अर्जुन के के बारे नक्षत्र विज्ञान के आधार पर जो कुछ भी बताया, वह पूरी तरह सही साबित हुआ। कौरव-पांडवों के बीच महाभारत युद्ध विनाशक रहा। इसके पीछे वजह यह थी कि युद्ध के पहले पक्ष में तिथि क्षय होने के तेरहवें दिन अमावस थी। इसके दूसरे पक्ष में भी तिथि क्षय थी। पूर्णिमा चौदहवें दिन आ गई और उसी दिन चंद्रग्रहण था। तिथि-नक्षत्रों की यही स्थिति व नतीजे गर्ग मुनिजी ने पहले बता दिए थे।

💥बौद्धयन -
भारतीय त्रिकोणमितिज्ञ के रूप में जाने जाते हैं। कई सदियों पहले ही तरह-तरह के आकार-प्रकार की यज्ञवेदियां बनाने की त्रिकोणमितिय रचना-पद्धति बौद्धयन ने खोजी। दो समकोण समभुज चौकोन के क्षेत्रफलों का योग करने पर जो संख्या आएगी, उतने क्षेत्रफल का ‘समकोण’ समभुज चौकोन बनाना और उस आकृति का उसके क्षेत्रफल के समान के वृत्त में बदलना, इस तरह के कई मुश्किल सवालों का जवाब बौद्धयन ने आसान बनाया।

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Thursday, November 13, 2014

एक महत्वपूर्ण पोस्ट जो whats app पर काफी प्रचारित हो रही है।

मोदी सरकार के कैबिनेट मंत्री ....

With   MOBILE NUMBER...

1. राजनाथ सिंह (BJP UP-Lucknow)
गृह मंत्रालय
+911123353881

2. सुषमा स्वराज (BJP MP-Vidisha)
विदेश मंत्रालय, विदेश मामले मंत्रालय
+919868181930

3. अरुण जेटली (BJP)
वित्त मंत्रालय, कॉर्पोरेट मामले, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय


4. एम वेंकैया नायडू (BJP KRNTK)
शहरी विकास मंत्रालय, आवास तथा शहरी गरीबी उन्‍मूलन, संसदीय मामले
+919868181988

5. नितिन गडकरी (BJP MH-Nagpur)
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, शिपिंग मंत्रालय
+917122727145

6. मनोहर पर्रिकर (BJP Goa)
रक्षा मंत्रालय
+919822131213

7. सुरेश प्रभु (BJP MH)
रेल मंत्रालय
+919821589555

8. डीवी सदानंद गौड़ा (BJP KRNTK-Udupi Chikmanglur)
कानून एवं न्‍याय मंत्रालय
+919448123249

9. उमा भारती (BJP UP-Jhansi)
जलसंसाधन मंत्रालय, नदी विकास तथा गंगा पुनरुद्धार
+919953813664

10. डॉ. नजमा ए हेपतुल्ला (BJP MP)
अल्पसंख्यक मंत्रालय
+919868181974

11. रामविलास पासवान (LJP BHR-Hajipur)
उपभोक्‍ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय
+911123017681

12. कलराज मिश्रा (BJP UP-Deoria)
लघु उद्योग मंत्रालय (सूक्ष्‍म, लघु तथा मझोले उद्योग)
+919818700040

13. मेनका संजय गांधी (BJP UP-Pilibhit)
महिला एवं बाल विकास मंत्रालय
+919013180192

14. अनंत कुमार (BJP KRNTK-Bangluru)
उर्वरक एवं रसायन मंत्रालय
+919868180337

15. रविशंकर प्रसाद (BJP BHR)
संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी
+919868181730

16. जगत प्रकाश नड्डा (BJP Himachal)
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय
+918800633377

17. अशोक गजपति राजू पशुपति (TDP AP-Vizianagaram)
नागरिक उड्डयन मंत्रालय
+919440822599

18. अनंत गीते (SS MH-Raigarh)
भारी उद्योग तथा सार्वजनिक उद्यमिता मंत्रालय
+919868180319

19. हरसिमरत कौर बादल (SAD PNB-Bathinda)
खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग
+919013180440

20. नरेंद्र सिंह तोमर (BJP MP-Gwalior)
खनन एवं इस्पात मंत्रालय
+919013180134
+919425110500

21. चौधरी बीरेंदर सिंह (BJP HR)
ग्रामीण विकास, पंचायती राज, पेयजल एवं स्वच्छता मंत्रालय
+919013181818

22. जुएल उरांव (BJP Odissa-Subdrrgarh)
जनजातीय मामले
+919868180206

23. राधा मोहन सिंह (BJP BHR-Poorvi Champaran)
कृषि मंत्रालय
+919013180251
+919431233001
+919431815551

24. थावरचंद गहलोत (BJP MP) सामाजिक न्‍याय तथा अधिकारिता मंत्रालय
+919711949789
+919425091516
+919868180049

25. स्मृति ईरानी (BJP)
मानव संसाधन विकास मंत्रालय
+919820075198

26. डॉ. हर्षवर्धन (BJP Delhi-Chandi chawk)
विज्ञान एवं तकनीकी, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय
+919810115311

मोदी सरकार के केंद्रीय राज्य मंत्री

27. जनरल वीके सिंह (BJP UP-Ghaziabad)
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्‍वयन (स्‍वतंत्र प्रभार), विदेशी मामले, प्रवासी मामले

28. राव इंद्रजीत सिंह (BJP HR-Gurgaon)
आयोजना (स्‍वतंत्र प्रभार), रक्षा
+919013180525

29. संतोष कुमार गंगवार (BJP UP-Baraiky)
कपड़ा (स्‍वतंत्र प्रभार)

30. बंडारू दत्तात्रेय (BJP Telangana-Secundarabad)
श्रम एवं रोजगार मंत्रालय (स्वतंत्र प्रभार)
+919440585999

31. राजीव प्रताप रूडी (BJP BHR-Saran)
कौशल विकास, उद्यमिता (स्वतंत्र प्रभार), संसदीय मामले
+919811119257

32. श्रीपद येस्‍सो नाइक (BJP Goa North)
आयुष (स्वतंत्र प्रभार), स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण
+919822122440
+919868180630

33. धर्मेंद्र प्रधान (BJP)
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस (स्वतंत्र प्रभार)

34. सर्बानंदा सोनवाल (BJP Assam-Lakhimpur)
युवा मामले और खेल (स्‍वतंत्र प्रभार)
+919435531147

35. प्रकाश जावड़ेकर (BJP MH)
पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन (स्वतंत्र प्रभार)
+919899331117

36. पीयूष गोयल (BJP MH)
ऊर्जा (स्वतंत्र प्रभार), कोयला (स्वतंत्र प्रभार), नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा (स्‍वतंत्र प्रभार)

37. डॉ. जितेंद्र सिंह (BJP J&K-Udhampur)
पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास (स्‍वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग
+919419192900

38. निर्मला सीतारमण(BJP AP)
वाणिज्‍य एवं उद्योग (स्‍वतंत्र प्रभार)
+919910020595

39. डॉ. महेश शर्मा (BJP UP-Gautambudhnagar, Noida)
संस्कृति (स्वतंत्र प्रभार), पर्यटन (स्वतंत्र प्रभार), नागरिक उड्डयन
+919873444255

40. मुख्तार अब्बास नकवी (BJP-UP)
अल्पसंख्य मामले, संसदीय मामले
+919899331115

41. राम कृपाल यादव (BJP BHR-Patliputra)
पेयजल एवं स्वच्छता
+919431800966

42. हरिभाई पार्थीभाई चौधरी(BJP GJ-Banaskantha)
गृह मामले
+919426502727

43. सांवर लाल जाट (BJP RJ-Ajmer)
जल संसाधन, नदी विकास तथा गंगा पुनरुद्धार

44. मोहनभाई कल्याणजीभाई कुंडारिया (BJP GJ-Rajkot)
कृषि
+919825005386

45. गिरिराज सिंह (BJP BHR-Nawada)
सूक्ष्‍म, लघु तथा मझोले उद्योग
+919431018799

46. हंसराज गंगाराम अहीर (BJP MH-Chandrapur)
रसायन एवं उर्वरक
+919868180489

47. जीएम सिद्धेश्वर (BJP KRNTK-Devanagere)
भारी उद्योग तथा सार्वजनिक उद्यमिता
+919868180264

48. मनोज सिन्हा (BJP UP-Ghazipur)
रेल
+919415209958
+918826611111

49. निहालचंद (BJP RJ-Ganganagar)
पंचायती राज
+919414090050

50. उपेंद्र कुश्वाहा (RLSP BHR-Karakat)
मानव संसाधन विकास
+919431026399

51. राधाकृष्णन पी- सड़क परिवहन एवं राजमार्ग, शिपिंग

52. किरण रिजिजू (BJP Arunachal West)
गृह मामले
+919436460000

53. कृष्णन पाल- सामाजिक न्‍याय एवं अधिकारिता

54. डॉ. संजीव कुमार बाल्यान (BJP UP-Muzaffarnagar)
कृषि
+919219583103

55. मनसुखभाई धानजीभाई वसावा (BJP GJ-Bharuch)
जनजातीय मामले
+919868180050

56. रावसाहेब दादाराव दानवे(BJP MH-Jalna)
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण
+919868180280

57. विष्णु देव साई (BJP CHH Raigarh)
खनन एवं इस्पात
+919425251933


58. सुदर्शन भगत (BJP JHR- Lohardaga)
ग्रामीण विकास
+919013180273

59. प्रो. राम शंकर कठेरिया (BJP UP Agra)
मानव संसाधन विकास
+919412750008
+919013180116

60. वाईएस चौधरी- विज्ञान एवं तकनीकी, पृथ्वी विज्ञान

61. जयंत सिन्हा (BJP JHR-Hazaribagh)
वित्त
+919811716444

62. कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौर(BJP RJ-Jaipur Rular) सूचना एवं प्रसारण
+919460996611

63. बाबुल सुप्रियो (BJP WB -Asansol)
शहरी विकास, आवास एवं शहरी गरीबी उन्मूलन
+919821333300
+919920033330

64. साध्वी निरंजन ज्योति (BJP UP-Fatehpur)
खाद्य प्रसंस्‍करण उद्योग
+919415532346

65. विजय सांपला (BJP PNB-Hoshiyarpur)
सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता
+919876099143
.Mobile

Thursday, August 28, 2014

शाकाहारी बनो

कविता का एक एक शब्द गहराई से समझे।
गर्व था भारत-भूमि को
कि महावीर की माता हूँ।।
राम-कृष्ण और नानक- बुद्ध
जैसे वीरो की यशगाथा हूँ॥
कंद-मूल खाने वाले बुद्ध से
मांसाहारी भी डरते थे।।
पोरस जैसे शूर-वीर को
नमन 'सिकंदर' करते थे॥
चौदह वर्षों तक वन में
जिसका धाम था।।
मन-मन्दिर में बसने
वाला शाकाहारी राम था।।
चाहते तो खा सकते थे
वो मांस पशु के ढेरो में।।
लेकिन उनको प्यार मिला
' शबरी' के झूठे बेरो में॥
चक्र सुदर्शन धारी थे
गोवर्धन पर भारी थे॥
मुरली से वश करने वाले
'गिरधर' शाकाहारी थे॥
पर-सेवा, पर-प्रेम का परचम
चोटी पर फहराया था।।
निर्धन की कुटिया में जाकर जिसने मान बढाया था॥
सपने जिसने देखे थे
मानवता के विस्तार के।।
नानक जैसे महा-संत थे
वाचक शाकाहार के॥
उठो जरा तुम पढ़ कर
देखो गौरवमयी इतिहास को।।
आदम से गाँधी तक फैले
इस नीले आकाश को॥
दया की आँखे खोल देख लो
पशु के करुण क्रंदन को।।
इंसानों का जिस्म बना है
शाकाहारी भोजन को॥
अंग लाश के खा जाए
क्या फ़िर भी वो इंसान है?
पेट तुम्हारा मुर्दाघर है
या कोई कब्रिस्तान है?
आँखे कितना रोती हैं
जब उंगली अपनी जलती है।।
सोचो उस तड़पन की हद
जब जिस्म पे आरी चलती है॥
बेबसता तुम पशु की देखो
बचने के आसार नही।।
जीते जी तन काटा जाए,
उस पीडा का पार नही॥
खाने से पहले बिरयानी,
चीख जीव की सुन लेते।।
करुणा के वश होकर तुम भी शाकाहार को चुन लेते॥
शाकाहारी बनो...!

क्या आज की नारी स्वतंत्र और सशक्त है?

बहुत अच्छा लगता है, जब टीवी चलाते ही सामने एक सुन्दर सी बाला स्वागत करती हुई दिखाई दे जाती है. मन कोल्ड ड्रिंक पीने को मचल उठता है, जब एक विश्व सुंदरी अपने सुन्दर होठों से लगाये हुए कहती है, ‘पियो सर उठा के’. और समाचार और भी आकर्षक लगने लगते हैं, जब उन्हें कोई दमकता चेहरा, सुरीली आवाज में सुना रहा होता है.

साथ ही साथ मैं इस सुखद भ्रम में भी डूब जाता हूँ, कि स्त्री सच में सशक्त हो रही है. आज कोई कोना नहीं बचा, जहाँ स्त्री ने अपनी उपस्थिति ना दर्ज की हो.

ऐसे ही एक सुखद भ्रम में खोया, टीवी पर बोल रही बाला को सुन ही रहा था, कि अचानक ठिठक सा गया. एक अर्धनग्न सी युवती, समंदर किनारे किसी बंद, पानी की बोतल का प्रचार कर रही थी. मैं उसकी अवस्था को देखकर हतप्रभ था. समझ नहीं पा रहा था, कि यह कौन से ‘पानी’ का प्रचार है..!!? क्या यह सच में उसी ‘पानी’ का प्रचार है, जो उस बोतल में बंद है, या फिर यह उस ‘पानी’ का प्रचार है, जो इस ‘पानी’ की आड़ में ‘पानी-पानी’ कर दिया गया.

यह कैसी सशक्तता है? क्या स्त्री इसी सशक्तता के लिए बेचैन थी? क्या यही प्राप्ति उसका अंतिम लक्ष्य है?

एक कटु सत्य यही है कि स्त्री आज भी सशक्त नहीं है, बल्कि वह पुरुष के हाथों सशक्तता के भ्रम में पड़कर स्वयं को छल रही है.

‘हे विश्वसुन्दरी, तुमने क्या खोया, क्या पाया है…

तन को बाजारों में बेचा, फिर तुमने क्या कमाया है….’

स्त्री देह के छोटे होते वस्त्र और उसकी सुन्दरता को मिलते बड़े पुरस्कार…...यह सब एक रणनीति रही है, इस पुरुष समाज की…स्त्री को छलने के लिए….दुर्भाग्य यही है, कि स्त्री स्वयं को उन्ही बड़े पुरस्कारों के आधार पर जांचने लगी. स्त्री को अपनी सुन्दरता का प्रमाण उन पुरस्कारों में दिखाई देने लगा…

जिस स्त्री को अपने आभूषणों में सुन्दरता दिखती थी, उसे अब अपनी अर्धनग्न देह ज्यादा सुन्दर लगने लगी. और रही बात पुरुष समाज की, तो वह तो सदा से यही चाहता रहा है. जो यह समाज तमाम अत्याचारों और बल के बाद भी नहीं कर पाया था, कुछ बुद्धिजीवियों ने इतनी सरलता से उसे कर दिखाया, कि स्त्री स्वयं ही अपने वस्त्र उतार बैठी.

कन्हैया सोच रहे हैं, कि शायद कोई द्रौपदी अपने चीर की रक्षा के लिए आवाज देगी… लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है, क्योंकि यहाँ कोई दुशासन चीर हरण कर ही नहीं रहा है, यहाँ तो अब स्वयं द्रौपदी ही अपने चीर को त्याग रही है, तब फिर भला कन्हैया भी क्या करें?

सरकार की दृष्टि में सशक्तता का प्रमाणपत्र अब बार या पब में जाकर ही मिल सकता है. यह सब कुछ मात्र राजनीति का हिस्सा नहीं है. यह एक बहुत बड़ी रणनीति है, समाज के अन्दर से मनुष्यता और संस्कृति को मारने की.

पिछले दशक में अचानक ही हिन्दुस्तानी सुंदरियों को विश्व-सुंदरी और ब्रह्माण्ड-सुंदरी का ताज मिलने के पीछे उनकी सुन्दरता को पुरस्कृत करने का ध्येय कदापि नहीं था. इसके पीछे खेल था, यहाँ से संस्कृति को पुरस्कारों के जरिये ख़त्म कर देने का. और वह इसमें सफल भी रहे. अब हर रोज कहीं न कहीं गली-सुंदरी, मोहल्ला-सुंदरी, और पार्टी-सुंदरी के ताज मिलते रहते हैं.

स्त्री की सुन्दरता के दृष्टिकोण को बदल दिया गया. अब ‘न्यूनतम वस्त्र, अधिकतम आधुनिक सुन्दरता’ के द्योतक बना दिए गए.चलचित्रों (फिल्मों) का कैमरा अब अभिनेत्री की ‘कजरारी आँखों’ से उतर कर, उसकी ‘बलखाती कमर’ पर टिक चुका है. अब अभिनेता-अभिनेत्री की मुलाकात किसी बगीचे में, पेडों की ओट में नहीं, बल्कि समंदर किनारे किसी ‘बीच-पार्टी’ में होती है. जहाँ स्विमसूट में अभिनेत्री का एक दृश्य आवश्यक हो गया है.

दुर्भाग्य से स्त्री इसे ही अपनी स्वतंत्रता और सशक्तता का पैमाना मानने लगी है.

समय रहते स्त्री को इस अवधारणा से बाहर निकल कर अपनी सर्वोच्चता और पूर्णता की प्राप्ति के लिए प्रयास शुरू करना होगा. जिस दिन हर स्त्री अपनी पूर्णता को स्वीकार कर अपूर्ण पुरुष की समानता के भ्रमजाल से बाहर आ जायेगी, वह पूर्ण स्वतंत्र और सशक्त हो उठेगी. तब कोई दुसाशन ना चीर हरण का प्रयास करेगा, ना ही कृष्ण को चीर बचाने की चिंता होगी……

आखिर कृष्ण के लिए और भी तो काम हैं….

Tuesday, June 24, 2014

शिर्डी साईं- भारत के इतिहास का सबसे बड़ा पाखंड।


साईं के बारे में अब तक का सबसे बड़ा खुलासा :
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पिण्डारी डाकू साईं की असली कहानी और उसके द्वारा हिन्दुओ के खिलाफ जिहाद फैलाने के षड्यंत्र का भांडाफोड़

पिछले दिनों मेरे एक मित्र ने शिर्डी साईं के बारे में बहुत सी जानकारी इकठ्ठा की और मुझे बताया की साईं असल में क्या है कहा से आया, जन्म मरण और फिर इतना लम्बे समय बाद उसका अचानक भगवान बन कर निकलना,

ये सब कोई संयोग नहीं सोचा समझा षड्यंत्र है,
ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसी MI5 जी हाँ मित्रो, एक ब्रिटिश एजंसी ने श्री राम मंदिर आन्दोलन के बाद अचानक साईं की भक्ति में तेजी देखि, वैसे ब्रिटेन और शिर्डी के साईं का रिश्ता बहुत ही गहरा है क्युकी ये साईं वही है जो 1857 की क्रांति में कुछ लूटेरो के साथ पकड़ा गया था, और वह अहमदनगर में पहली बार साईं की फोटो ली गयी थी, जिसे मैं जल्दी ही आप सभी के सामने पेश करूँगा

MI5 ब्रिटेन की ख़ुफ़िया एजेंसी है , साईं का पूरा इतिहास खोज निकलने में इस एजंसी का महत्वपूर्ण योगदान है, साईं का जन्म 1838में हुआ था, पर कैसे हुआ और उसके बाद की पूरी कथा बहुत ही रोचक है,

साईं के पिता का असली नाम था बहरुद्दीन, जो की अफगानिस्तान का एक पिंडारी था, वैसे इस पर एक फिल्म भी आई थी जिसमे पिंडारियो को देशभक्त बताया गया है, ठीक वैसे ही जैसे गाँधी ने मोपला और नोआखली में हिन्दुओ के हत्यारों को स्वतंत्रसेनानी कहा था,
औरंगजेब की मौत के बाद मुग़ल साम्राज्य ख़तम सा हो गया था केवल दिल्ली उनके

आधीन थी, मराठा के वीर सपूतो ने एक तरह से हिन्दू साम्राज्य की नीव रख ही दी थी, ऐसे समय में मराठाओ को बदनाम करके उनके इलाको में लूटपाट करने का काम ये पिंडारी करते थे, इनका एक ही काम था लूत्पार करके जो औरत मिलती उसका बलात्कार करना, आज एक का बलात्कार कल दूसरी का, इस तरह से ये मराठाओ को तंग किया करते थे, पर समय के साथ साथ देश में अंग्रेज आये और उन्होंने इन पिंडारियो को मार मार कर ख़तम करना शुरू किया,

साईं का बाप जो एक पिंडारी ही था, उसका मुख्य काम था अफगानिस्तान से भारत के राज्यों में लूटपाट करना, एक बार लूटपाट करते करते वह महाराष्ट्र के अहमदनगर पहुचा जहा वह एक वेश्या के घर रुक गया, उम्र भी जवाब दे रही थी, सो वो उसी के पास रहने लग गया, कुछ समय बाद उस वेश्या से उसे एक लड़का और एक लड़की पैदा हुआ, लड़के का नाम उसने चाँद मियां रखा और उसे लेकर लूट पात करना सिखाने के लिए उसे अफगानिस्तान ले गया,

उस समय अंग्रेज पिंडारियो की ज़बरदस्त धर पकड़ कर रहे थे इसलिए बहरुद्दीन भेस बदल कर लूटपाट करता था उसने अपने सन्देश वाहक के लिए चाँद मिया को रख लिया,
चाँद मिया आज कल के उन मुसलमान भिखारियों की तरह था जो चादर फैला कर भीख मांगते थे, जिन्हें अँगरेज़ blanket bagger कहते थे, चाँद मिया का काम था लूट के लिए सही वक़्त देखना और सन्देश अपने बाप को देना, वह उस सन्देश को लिख कर उसे चादर के निचे सिल कर हैदराबाद से अफगानिस्तान तक ले जाता था, पर एक दिन ये चाँद मियां अग्रेजो के हत्थे लग गया और उसे पकडवाने में झाँसी के लोगो ने अंग्रेजो की मदद की जो अपने इलाके में हो रही लूटपाट से तंग थे

उसी समय देश में पहली आजादी की क्रांति हुई और पूरा देश क्रांति से गूंज उठा, अंग्रेजो के लिए विकत समय था और इसके लिए उन्हें खूंखार लोगो की जरुरत थी, बहर्दुद्दीन तो था ही धारण का लालची, सो उसने अंग्रेजो से हाथ मिला लिया और झाँसी चला गया, वह उसने लोगो से घुलमिल कर झाँसी के किले में प्रवेश किया और समय आने पर पीछे से दरवाजा खोल कर रानी लक्ष्मी बाई को हारने में अहम् भूमिका अदा की,

यही चाँद मिया आठ साल बाल जेल से छुटकर कुछ दिन बाद शिर्डी पंहुचा और वह के सुलेमानी लोगो से मिला जिनका असली काम था गैर मुसलमानों के बिच रह कर चुपचाप इस्लाम को बढ़ाना| चाँद मियां ने वही से अल तकिया का ज्ञान लिया और हिन्दुओ को फ़साने के लिए साईं नाम रख कर शिर्डी में आसन जमा कर बैठ गया, मस्जिद को जानबूझ कर एक हिन्दू नाम दिया और उसके वहा ठहराने का पूरा प्रबंध सुलेमानी मुसलमानों ने किया, एक षड्यंत्र के तहत साईं को भगवान का रूप दिखाया गया और पीछे से ही हिन्दू मुस्लिम एकता की बाते करके स्वाभिमानी मराठाओ को मुर्दा बनाने के लिए उन्हें उनके ही

असली दुश्मनों से एकता निभाने का पाठ पढाया गया
पर पीछे ही पीछे साईं का असली मकसद था लोगो में इस्लाम को बढ़ाना, इसका एक उदाहरण साईं सत्चरित्र में है की साईं के पास एक पोलिस वाला आता है जिसे साईं मार मार भगाने की बात कहता है,

अब असल में हुआ ये की एक पंडित जी ने अपने पुत्र को शिक्षा दिलवाने के लिए साईं को सोंप दिया पर साईं ने उसका खतना कर दिया जब पंडित जी को पता चला तो उन्होंने कोतवाली में रिपोर्ट कर दी, साईं को पकड़ने के लिए एक पुलिस वाला भी आया जिसे साईं ने मार कर भगाने की बात कही थी,
ये तभी की फोटो है जब पुलिस वाला साईं को पकड़ने गया था और साईं बुरका पहन कर भागा था
शेयर करे और इस जिहादी साईं की असली सच्चाई सभी को बताये  l

Admin
मेरा साई बाबा से कोई
निजी दुष्मनी नही है ।

परतुं हिन्दू धर्म को नाश हो रहा है, इसलिए मै
कुछ सवाल करना चाहता हू,
हिन्दू धर्म एक सनातन धर्म है, लेकिन लोग
आज कल लोग इस बात से परिचित नही है क्या
जब भारत मे अंग्रेजी सरकार अत्याचार , और
और सबको मौत के घाट उतार रहे थे तब साई बाबा ने

कौन से
ब्रिटिश अंग्रेजो के साथ आंदोलन
किया ? जिदंगी भिख मांगने मे कट गई?
मस्जिद मे रह कर कुरान पढना जरूरी था.
बकरे हलाल करना क्या जरूरी था ?
सब पाखंड है, पैसा कमाने का जरिया है।
ऐसा कौन सा दुख है कि उसे भगवान दूर नही
कर सकते है, श्रीमतभगवत
गीता मे लिखा है कि
श्मशान और समाधि की पुजा करने वाले मनुष्य
राक्षस योनी को प्राप्त होते है

साई जैसे पाखंडी की आज इतनी ज्यादा मार्केटिंग हो गयी है कि हमारे हिन्दू भाई बहिन आज अपने मूल धर्म से अलग होकर साई मुल्ले कि पूजा करने लगे है। आज लगभग हर मंदिर में इस जिहादी ने कब्जा कर लिया है। हनुमान जी ने हमेशा सीता राम कहा और आज के मूर्ख हिन्दू हुनमान जी का अपमान करते हुए सीता राम कि जगह साई राम कहने लगगए । बड़ी शर्म कि बात है। आज जिसकी मार्केटिंग ज्यादा उसी कि पूजा हो रही है। इसी लिए कृष्ण भगवान ने कहा था कि कलयुग में इंसान पथ और धर्म दोनों से भ्रष्ट हो जाएगा। 100 मे से 99 को नहीं पता साई कौन था इसने कौन सी किताब लिखी क्या उपदेश दिये पर फिर भी भगवान बनाकर बैठे है।

साई के माँ बाप का सही सही पता नहीं पर मूर्खो को ये पता है कि ये किस किस के अवतार है। अंग्रेज़ो के जमाने मे मूर्खो के साई भगवान पैदा होकर मर गए पर किसी भी एक महामारी भुखमरी मे मदद नहीं की। इनके रहते भारत गुलाम बना रहा पर इन महाशय को कोई खबर नहीं रही। शिर्डी से कभी बाहर नहीं निकले पर पूरे देश मे अचानक इनकी मौत के 90-100 साल बाद इनके मंदिर कुकरमूतते की तरह बनने लगे। चालीसा हनुमान जी की हुआ करती थी आज साई की हो गयी। राम सीता के हुआ करते थे। आज साई ही राम हो गए। श्याम राधा के थे आज वो भी साई बना दिये गए। ब्रहस्पति दिन विष्णु भगवान का होता था आज साई का मनाया जाने लगा। भगवान की मूर्ति मंदिरो में छोटी हो गयी और साई विशाल मूर्ति मे हो गए।

प्राचीन हनुमान मंदिर दान को तरस गए और साई मंदिरो के तहखाने तक भर गए। मूर्ख हिन्दुओ अगर दुनिया मे सच मे कलयुग के बाद भगवान ने इंसाफ किया तो याद रखना मुह छुपाने के लिए और अपनी मूर्ख बुद्धि पर तरस खाने के लिए कही शरण भी न मिलेगी। इसलिए भागवानो की तुलना मुल्ले साई से करके पाप मत करो। और इस लेख को पढ़ने के बाद भी न समझ मे आए तो अपना खतना करवाके मुसलमान बन जाओ।

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